Saturday, 24 June 2017

हिन्दू धर्म के पतन के कारण और निवारण

हिन्दू धर्म के पतन के कारण और निवारण

ध्यान से पढ़ें, समझें और जीवन में उतारें |
क्योंकि जो गलती को ठीक करले उसे ही मनुष्य कहते हैं |

हिन्दुओं के सभी प्रमुख गुणों को मुसलमान, ईसाई और बौद्धों ने अपनाया और संसार में छा गए और हिन्दू इन्हें त्याग कर बर्बाद होने की कगार पर हैं |

1) हम यज्ञोपवीत, उपनयन या जनेऊ करवा कर सात से ग्यारह वर्ष के बच्चों को गुरुकुल भेजते थे. . अब बंद है |
दूसरी तरफ मुसलमान और ईसाई नियम से मदरसा व् मिशन स्कूल में पहले धर्म की शिक्षा देते हैं | मदरसे, मिशनरी स्कूल हजारों लाखों की संख्या में खुल गए | हिन्दूओं के बच्चे भी उसी में शौक से जा रहे हैं और सेकुलरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है |

2) प्रत्येक सनातन धर्मावलम्बी के लिए अनिवार्य गायत्री महामंत्र की त्रिकाल संध्या (सुबह, दोपहर, शाम तीनों समय जप-ध्यान) समाप्त |
दूसरी तरफ उनकी पाँच वक्त की नमाज और रोज की प्रेयर शुरू |

3) सप्ताह में कम से कम एक दिन, पूजा, सत्संग, संगठन के लिए मंदिर जाना बंद |
दूसरी तरफ उनका जुमे के दिन नमाज मस्जिद में, और Sunday prayer चर्च में शुरू |

4) साधू-संत-गुरु जनों का आदर बंद (हिन्दू अब अपने साधू संतो का अपमान खुले आम करते हैं और उपहास करते हैं) |
दूसरी तरफ उनके मौलवी, पादरी को भरपूर सम्मान मिलता है |

5) घरेलू समारोहों में धर्म-चर्चा बंद (केवल रटी-रटायी सत्यनारायण कथा, अखंड रामायण पाठ या कीर्तन) |
दूसरी तरफ उनके मौलाना की मिलाद (सत्संग) और पादरी का प्रवचन नियम से होते हैं |

6) देवता, धर्म-गुरु का अपमान होने पर जुबान खींच लेना बंद |
दूसरी तरफ उनका ईश निंदा कानून | धर्म विरुद्ध एक भी बात बर्दाश्त नहीं |

7) धर्म और साम्राज्य विस्तार के लिए अश्वमेध यज्ञ से पूरी पृथ्वी पर साम्राज्य विस्तार का लक्ष्य समाप्त |
दूसरी तरफ उन्होंने धर्म और राजनीति को जोड़कर दारुल इस्लाम और पूरे संसार को इसाई बनाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया |

8) पिछले 67 वर्षों में कांग्रेस सरकार की हिन्दू विरोधी, षड्यंत्रकारी नीतियों से, विद्यालयों में हिन्दू विरोधी पाठ्यक्रम और शिक्षा से हिन्दुओं को सेकुलर बना दिया |
दूसरी तरफ उन्हें अल्पसंख्यक के नाम पर भरपूर सरकारी अनुदान देकर उनकी धार्मिक शिक्षा को बढ़ावा देकर और कट्टर बना दिया |

इसीलिए संसार में हिन्दुओं का एक भी देश नहीं दूसरी तरफ मुसलामानों के 56 देश और ईसाईयों के विश्व में 150 से अधिक देश हैं |

*परिणाम :-* भारत का प्रधानमन्त्री, राष्ट्रवादी हिन्दू श्री Narendra Modi जी भी सेकुलर बनने के लिए विवश हो जाता है | कारण कि कट्टर हिन्दुत्व से विश्व के दो सौ से अधिक मुस्लिम और इसाई देशों की शह पर देश में गृह युद्ध छिड़ जाएगा | भारत का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जायेगा | पर मूर्ख हिन्दू ये मानने-समझने को तैयार नहीं | वो तो मोदी का अपमान करने में ही अपनी बहादुरी समझता है |

इसलिए हिन्दू एकता के लिए एक ही रास्ता बचा है :- जडों की ओर लौटें क्योंकि जड़ें सूख गई हैं | सनातन धर्म के मजबूत आधार ये हैं गायत्री, यज्ञ, गीता, गंगा, गौमाता, ज्योतिर्विद्या (जन्म कुंडली) जिसे वेदों का नेत्र कहा गया है और सद्गुरु | इन्हें अपनाने से भाग्य की उन्नति होती है और दुर्भाग्य का शमन होता है | आज 99% हिन्दू ये नहीं करते इसीलिए पतन की गर्त में पहुँच गए हैं |

अतः आज से ही सनातन धर्म के इन सिद्धांतों का पालन करना शुरू कर दें क्योंकि धर्म आचरण करने पर ही ईश्वर रक्षा करता है | धन, जन से भरपूर बनाता और विपत्ति हरता है |

*आओ मिलकर करें साधना, दिव्य शक्ति (गायत्री) के मंत्र की |*
*गूँजे फिर जयकार धरा पर, सत्य सनातन धर्म की |*

।।जय जय श्री राम।।

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धन्यवाद !
जय श्री राम

Saturday, 10 June 2017

“कुमारी देवी” लोग जिसे देवी मान कर पूजते है ।

“कुमारी देवी”

कुछ समय पहले तक विश्व का एकमात्र हिन्दू राष्ट्र कहा जाने वाला भारत का पड़ोसी देश नेपाल कुछ ऐसी ही कहानी कहता है जो ईश्वर के अवतार पर विश्वास करने पर बल देती है। नेपाल के लोगों को पिछले सालो भयंकर त्रासदी का सामना करना पड़ा। अत्याधिक तीव्रता से आए भूकंप ने नेपाल की जमीन को हिलाकर रख दिया, हजारों की संख्या में लोग इस प्राकृतिक आपदा की भेंट चढ़ गए। लेकिन एक स्थान ऐसा था जहां मौजूद लोगों पर आंच तक नहीं आई और वह स्थान था जीवित देवी के नाम से प्रख्यात नेपाल की ‘कुमारी देवी’ का मंदिर।

नेपाल के लोगों का मानना है कि ये जीवित देवियां आपदा के समय उनकी रक्षा करती हैं। इस मान्यता की शुरुआत 17वीं शताब्दी के आरंभ में ही हो गई थी। तब से लेकर अब तक नेपाल निवासी छोटी बच्चिययों को देवी का रूप मानकर उन्हें मंदिरों में रखकर उनकी पूजा करते हैं। उन्हें समाज और अपने परिवारों से अलग रहना पड़ता है।

नेपाल के लोगों की जीवित देवी या कुमारी देवी शाक्य या वज्रचार्य जाति से संबंध रखती हैं, इन्हें नेपाल के नेवारी समुदाय द्वारा पहचाना जाता है। नेपाल में करीब 11 कुमारी देवियां होती हैं जिनमें से रॉयल गॉडेस या कुमारी देवी को सबसे प्रमुख माना गया है।

शाक्य और वज्राचार्य जाति की बच्चियों को 3 वर्ष का होते ही अपने परिवार से अलग कर दिया जाता है और उन्हें ‘कुमारी’ नाम दे दिया जाता है। इसके पश्चात 32 स्तरों पर उनकी परीक्षाएं होती हैं। इन सभी बच्चियों को ‘अविनाशी’ अर्थात जिसका अंत नहीं हो सकता, कहा जाता है।

जिस तरह बौद्ध धर्म के लोग अपने लामा को चुनते हैं उसी तरह कुछ नेपाल की कुमारी देवी का चयन होता है। उनके भीतर कुछ ऐसे लक्षण देखे जाते हैं जो उनके कुमारी देवी बनने की एक कसौटी होते हैं। इसमें उनकी जन्म कुंडली में मौजूद ग्रह-नक्षत्र भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।

उनके समक्ष भैंस के कटे सिर को रखा जाता है, इसके अलावा राक्षस का मुखौटा पहने पुरुष वहां नृत्य करते हैं। कोई भी साधारण बच्ची उस दृश्य को देखकर भयभीत हो जाएगी लेकिन जो भी बच्ची बिना किसी डर के वहां रहती है, उसे मां काली का अवतार मानकर कुमारी देवी बनाया जाता है।

कुमारी देवी बनने के बाद उन्हें कुमारी घर में रखा जाता है, जहां रहकर वे अपना ज्यादातर समय पढ़ाई और धार्मिक कार्यों में बिताती हैं। वह केवल त्यौहार के समय ही घर से बाहर निकल सकती हैं लेकिन उनके पांव जमीन पर नहीं पड़ने चाहिए।

‘कुमारी देवी’ की पदवी उनसे तब छीन ली जाती है जब उन्हें या तो मासिक धर्म शुरू हो जाए या फिर किसी अन्य वजह से उनके शरीर से रक्त बहने लगे या फिर मामूली सी खरोंच ही क्यों ना पड़ जाए।

कुमारी देवी की पदवी से हटने के बाद उन्हें आजीवन पेंशन तो मिलती है लेकिन नेपाली मान्यताओं के अनुसार यह कहा जाता है कि जो भी पुरुष पूर्व कुमारी देवी से विवाह करता है उसकी मृत्यु कम उम्र में हो जाती है। इसलिए कोई भी पुरुष उनसे विवाह करने के लिए तैयार नहीं होता, जिस कारण उनमें से अधिकांश आजीवन कुंवारी रह जाती हैं।

नेपाल में रहने वाले बौद्ध और हिन्दू धर्म के लोग यह कहते हैं कि ये देवियां हर बुराई और आपदा से उनकी रक्षा करती हैं। इन्हें ईश्वर के समान ही पूजनीय माना जाता है। शाक्य वंश के लोग इन कुमारी देवियों की सुरक्षा का जिम्मा संभालते हैं।

जैसे ही बच्चियों को मासिक धर्म शुरू हो जाता है उन्हें कुमारी देवी की पदवी से हटा दिया जाता है और फिर एक नई कुमारी देवी की खोज शुरू की जाती है। पद से निवृत्त हुई कुमारियों को एक सरकारी आवास में रहना होता है। जिस आवास में ये कुमारी देवियां रहती हैं, नेपाल के लोगों के लिए वह स्थान बेहद पवित्र हो जाता है।

वर्तमान समय में मतीना शाक्य को दुर्गा का अवतार मानकर नेपाल की कुमारी देवी के नाम से पूजा जाता है। पूरा नेपाल इन्हें देवी के स्वरूप में पूजता है। कुमारी देवी सिर्फ त्यौहार के समय ही अपने आवास से बाहर आ सकती हैं।

जब भी किसी त्यौहार पर कुमारी देवी अपने आवास से बाहर निकलती हैं तब उनकी रक्षा का जिम्मा संभाले हुए शाक्य वंश के लोग उनकी पालकी को अपने कंधे पर उठाकर नगर में घुमाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार कुमारी देवी के दर्शन करना बहुत शुभ होता है।

क्यो हमारे पुर्वज पितृपक्ष मे कौवों के लिए खीर बनाने को कहते थे.......?

क्यो हमारे पुर्वज पितृपक्ष मे कौवों के लिए खीर बनाने को कहते थे.......? पीपल ओर बरगद को सनातन धर्म मे पूर्वजों की संज्ञा दी गई ह...