ओम शब्द ब्रह्मांड की नाभि है। शिव द्वारा जब हमारा ब्रह्माण्ड बना तो पहला शब्द ओम बना। ओम बोलने से ब्रह्मांड का नाभि चक्र चालू होता है । जो ब्रह्माण्ड में है। वह हमारे पिंड में है । हमारे शरीर में पहले नाभि चक्र है। हमारा नाभि चक्र चालू होता है, तो ब्रह्मांड की नाभि में जो शक्ति है, ब्रह्माण्ड की नाभि माना, सूर्य की शक्ति, सूर्य की पावर, हमारे अंदर आती है तो हमारा नाभि चक्र जागृत होता है। नाभि चक्र ओम की ध्वनि करने से ब्रह्मांड की नाभि से पावर आती है। ब्रह्माण्ड की नाभि से पावर आने से हमारे सारे चक्र जागृत होते हैं। जब आज्ञा चक्र जागृत होता है माना आत्म स्वरूप की अनुभूति होती है, आत्म ज्ञान होता है जिससे सहस्रार चक्र जागृत होता है। सहस्रार चालू होने से अनंत कोटि ब्रह्मांडों के साथ कनेक्शन होता है। पहले सूर्य के साथ कनेक्शन होता है। फिर धीरे-धीरे सहस्रार चक्र खुलने से हमारा महासूर्य माना महा ब्रह्माण्ड माना गैलेक्सी के साथ कनेक्शन होता है। इसके आगे जाओ तो हमारा सूक्ष्म शरीर बाहर निकलता है और हम यूनिवर्स तक जा सकते है।
NASA वालों ने बताया है कि सूर्य से ओम की ध्वनि निकलती रहती है जब हम ओम बोलते हैं तो सूर्य की फ्रीक्वेंसी से मैच होते हैं, और हमें सूर्य की पावर मिलती है। हमारा सूर्य आंखों का प्रतीक बताया गया है। हमारी आंखों के रोग दूर हो जाते हैं। हमारे शास्त्रों में बताया है कि सूर्य को सूर्य नारायण देवता ने बनाया और सूर्य नारायण को इस ब्रह्मांड के मालिक भगवान शिव ने बनाया। सूर्य के अंदर जो एनर्जी है जब हम सूर्य की उपासना करते है तो सूर्य की एनर्जी हमारे अंदर आएगी जो अग्नि तत्व है। हमारा शरीर पांच तत्वों का बना है। पांच तत्वों में अहम है अग्नि तत्व। हमारे सूक्ष्म शरीर के अंदर अग्नि तत्व जागृत होने से आत्मा को कुछ एनर्जी मिलती है इसलिए आत्मा में शक्ति आती है। आत्मा में शक्ति आने से हमारा कारण शरीर जागृत होता है। कारण शरीर जागृत होने से विक्रम विनाश होते हैं। विक्रम विनाश होने से रोग शोक सब दूर हो जाते हैं। भारत के शास्त्रों में लिखा है कि सूर्य की उपासना करो तो सूर्य की शक्ति मिलती है। साइंस वाले भी कहते हैं कि सूर्य की शक्ति हाइड्रोजन से हीलियम में रुपांतरित होती है, तो सूर्य की एनर्जी क्रिएट होती है सूर्य की एनर्जी जब आती है,तो हमारे रोग शोक ठीक हो जाते हैं मगर आत्मा की पूर्ण जागृति नहीं होती।
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